10 दिवसीय आत्म उत्थान श्रावक संस्कार शिविर

मुनि श्री 108 दुर्लभसागर महाराज जी

10 दिवसीय आत्म उत्थान श्रावक संस्कार शिविर

दशलक्षण महापर्व में 16 सितंबर 2026 से 25 सितंबर 2026 तक

युगश्रेष्ठ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी यतिराज नवाचार्य श्री 108 समयसागर जी यतिराज के प्रज्ञावंत शिष्य मुनि श्री 108 दुर्लभसागर महाराज जी, मुनि श्री 108 आदरसागर महाराज जी, मुनि श्री 108 स्वरूपसागर महाराज जी, क्षुल्लक श्री 105 निर्धूम सागर महाराज जी के सानिध्य में दशलक्षण महापर्व में 16 सितंबर 2026 से 25 सितंबर 2026 तक 10 दिवसीय आत्म उत्थान श्रावक संस्कार शिविर आयोजक एवं निवेदक : सकल दिगम्बर जैन समाज, पिपरई गाँव (जिला अशोकनगर)

परम पूज्य मुनि श्री दुर्लभसागर जी महाराज का दिव्य चित्र

परम पूज्य आचार्य परंपरा

परम पूज्य मुनि श्री दुर्लभसागर जी महाराज

संयम, साधना और आत्मकल्याण की दिव्य प्रेरणा

मुनि श्री दुर्लभसागर जी महाराज के जीवन, प्रवचन, विहार, आध्यात्मिक संदेश एवं धर्मकार्य से जुड़ें तथा जैन धर्म के वास्तविक सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा प्राप्त करें।

परम पूज्य मुनि श्री दुर्लभसागर जी महाराज
संयम • साधना • सेवा

॥ आचार्य श्री विद्यासागर परंपरा ॥

बीजाक्षर प्रणेता पूज्य मुनि श्री १०८ दुर्लभ सागर जी महाराज

संयम, साधना, त्याग और आत्मकल्याण के पथ पर निरंतर अग्रसर एक प्रेरणादायी संत व्यक्तित्व।

महान तपस्वी परम पूज्य आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावशाली शिष्य एवं बीजाक्षर प्रणेता पूज्य मुनि श्री १०८ दुर्लभ सागर जी महाराज का जीवन साधना, वैराग्य, आत्मानुशासन और आत्मचिंतन का अनुपम एवं प्रेरणादायी उदाहरण है।
आपकी प्रेरणा केवल धार्मिक क्रियाओं तक सीमित नहीं है, अपितु धर्म और अध्यात्म के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन एवं आचरण में आत्मसात करने की दिशा प्रदान करती है।
स्वाध्याय, ध्यान, संयम और सकारात्मक चिंतन के माध्यम से मनुष्य अपने अंतर्मन को समझे, आत्मचिंतन करे और आत्मकल्याण के पथ पर निरंतर आगे बढ़े—यही भावना आपकी प्रेरणाओं में प्रमुख रूप से अभिव्यक्त होती है।

संयम आत्मानुशासन का मार्ग
साधना आत्मशुद्धि की यात्रा
त्याग वैराग्य और अपरिग्रह
जिनवाणी आध्यात्मिक प्रेरणा
श्रद्धालुओं की अनुभूति
“गुरुदेव के प्रवचन जीवन में संयम, शांति और आत्मचिंतन की प्रेरणा प्रदान करते हैं। उनके दर्शन एवं वचनों से धर्म के प्रति श्रद्धा और आत्मकल्याण की भावना और दृढ़ होती है।”
राहुल जैन श्रद्धालु
श्रद्धालुओं की अनुभूति
“**“पूज्य मुनि श्री १०८ दुर्लभ सागर जी महाराज के प्रवचनों से जीवन को देखने की एक नई दृष्टि मिली। उनकी सरल वाणी आत्मचिंतन, संयम और सकारात्मक जीवन की प्रेरणा देती है।”**”
एक श्रद्धालु
आत्मचिंतन • शांति • साधना

ध्यान एवं साधना

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